सूरजपुर में हाथी ने 38 साल के युवक को कुचला, मौत: जंगल में मिला शव; एक हफ्ते में दूसरी मौत, ग्रामीणों में आक्रोश

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में हाथी के हमले में एक 38 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के जंगल की है। रविवार शाम परिजन और ग्रामीण उसे तलाशते हुए जंगल पहुंचे तो उसका शव मिला। शव के आसपास हाथी के पैरों के निशान भी पाए गए। वन विभाग ने प्रथम दृष्टया हाथी के हमले में मौत की आशंका जताई है।
घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। खास बात यह है कि प्रतापपुर क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर हाथी के हमले से यह दूसरी मौत बताई जा रही है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
जंगल में मिला शव, पास में थे हाथी के निशान
जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान करमचंद, उम्र 38 वर्ष के रूप में हुई है। वह जंगल की ओर गया था। शाम तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान जंगल में उसका शव मिला। मौके पर हाथी के पैरों के निशान मिलने के बाद वन विभाग को सूचना दी गई। वन अमला मौके पर पहुंचा और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
वन विभाग के अधिकारियों को आशंका है कि जंगल में अचानक हाथी से सामना होने के बाद करमचंद पर हमला हुआ और हाथी ने उसे कुचल दिया।
एक हफ्ते में दूसरी मौत से ग्रामीणों में गुस्सा
प्रतापपुर इलाके में लगातार हाथियों की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
एक ही सप्ताह में हाथी से जुड़ी दूसरी मौत सामने आने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और गांव के आसपास हाथियों की मौजूदगी की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती, जिससे लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
गांवों में दहशत, वन विभाग सतर्क
घटना के बाद वन विभाग की टीम क्षेत्र में निगरानी कर रही है। ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने और हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
मानव-हाथी संघर्ष के बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्रामीणों की सुरक्षा और हाथियों की निगरानी अब बड़ी चुनौती बन गई है।
क्यों बढ़ रहा है मानव-हाथी संघर्ष?
सूरजपुर और प्रतापपुर क्षेत्र में जंगल और ग्रामीण बस्तियों के आसपास हाथियों की आवाजाही नई बात नहीं है। कई बार जंगल में काम करने, लकड़ी या अन्य जरूरतों के लिए जाने वाले ग्रामीणों का अचानक हाथियों से सामना हो जाता है। ऐसे मामलों में कुछ ही सेकंड में स्थिति जानलेवा हो जाती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिलने और ग्रामीणों को तत्काल अलर्ट करने से ऐसे हादसों को कम किया जा सकता है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
लगातार हो रही घटनाओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर है।
क्या हाथियों की लोकेशन की जानकारी ग्रामीणों तक समय पर पहुंच रही है?
क्या संवेदनशील गांवों में निगरानी और गश्त पर्याप्त है?
और सबसे अहम—
एक सप्ताह में दूसरी मौत के बाद वन विभाग आगे ऐसे हादसे रोकने के लिए क्या कदम उठाता है?
फिलहाल करमचंद की मौत के बाद पूरे इलाके में दहशत है और ग्रामीण हाथियों की आवाजाही पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वन विभाग भी क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है।



